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Lockdown जज़्बात

जिंदगी के फ़साने

गरिमामयी बी. बी. डी.🙏🏻

******************************************** बी. बी. डी. के मंच पर  प्रतिभाओ की कमी नहीं हौसला ए जुनून जो हम में है वो शायद कहीं नहीं जुनून कुछ पाने का इस कदर डोलता है बच्चे बच्चे में यहाँ के एक हुनर बोलता है शिक्षा ही नहीं केवल, हम खेल में भी अभिरुचि रखते है ललित कलाओ का सागर अपनी मुट्ठी में लिए फिरते है शिक्षा का वर्चस्व इस कदर यहाँ लहराया है दूर दराज देश से बच्चा यहाँ पढने आया है देश में शिक्षा के शिखर पर हमारी एक मिसाल कायम है बात होनहार बनने की हो, बी. बी. डी. का नाम हाजिर है विगत वर्षो में हमने कामयाबी के हर मुकाम को छुआ है सिर्फ अपने प्रांगण में नहीं हर कोने में हमारा नाम हुआ है आने वाले समाज का प्रस्तुतीकरण है हम प्रेम और सौहार्द का उज्जवल दीपक है हम हम हमारी उपलब्धियों को कभी भी भूल नहीं पायेंगे बात जब मुकाम की होगी बी. बी. डी.  का नाम बतायेंगे *********************************************

फिर गया दिसम्बर...... जनवरी है आई

 **************************************** दिसम्बर का महिना देखो जाने को है या यूँ कहे यारो, जनवरी आने को है ऐ दिसम्बर मुझे तेरे जाने का गम नहीं है मेरी उम्मीदों को जनवरी ने थाम  रक्खा है वो चाय की चुसकियां, वो कुछ मीठे मीठे से पल उन अपनो की यारियो ने मुझे सम्भाल रक्खा है इस अन्त से ही तो नयी शुरुआत होती है जैसे हर रात के बाद सुबह साथ होती है क्यों रोए हम इस दिसम्बर, उन पुरानी यादों में चलो करते हैं स्वागत जनवरी का, नये वादो से सिर्फ़ यादों की झडियाँ नहीं कितने तजुर्बे साथ हैं शायद तभी जनवरी के महिने में एक नयी आस हैं ये फलसफा यूँ ही चलता रहेगा जैसे पल पल वक्त गुजरता रहेगा फिर दिसम्बर आयेगा एक नयी जनवरी लायेगा ***************************************

चुपचाप सब हो जाता है.........

जिंदगी चल तेरा हिसाब करते हैं

दामन उम्मीद का ...quotes

हौसला 😊

वो बचपन की यादें.....🧗...

****************************************** वो बचपन के दिन भी कितने खास होते थे हिसाब किसी लमहे का हमें रखना ना होता ना फिक्र किसी चीज़ की, ना पाने की चाह होती थी माँ की मुस्कुराहट में ही बस अपनी जान होती थी खिलौना भूल से जो टूट जाय दामन भीग जाता था आज दिलो को तोड़ देने का भी अफसोस नहीं होता सुकून के पल हमें  हर रोज मिल जाया करते थे आज फुरसत के लमहो को ढूंढ़ते जमाना हो गया हजारों गलतियों की सजा होती थी हम पर मुकर्रर आज तो अपनो की बाते भी बहुत तेज चुभती हैं शौक नये खिलौने से खेलने का हर रोज रखते थे दिलों से खेलना साहब  शायद अच्छा नहीं होता एक नज़र टिक जाय जिस पर हर हाल में मेरी होनी थी आज ख्वाहिशे जानकर भी हम नजरअंदाज करते हैं *********************************************

जिंदगी के पन्ने