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हुनर

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चाँद था मेरे करीब....

 

जिंदगी यूँही ज़ाया ना कर........

************************************** ज़ाया न करो जिंदगी का एक भी दिन  क्या पता कब रात हो जाए  बेताबियां तेरी कुछ कर दिखाने की देखकर  क्या पता कब खुदा भी मेहरबान हो जाए  ज़ुनून हो तुझमें इस कदर कुछ पाने का  दरिया में भी तेरी क़श्ती सवार हो जाए  बना लो अपने हुनर को अपनी पहचान  क्या पता कब मंजिल नसीब हो जाए  आसमां भी चूमे तुम्हारे कदमों को  क्या पता कुछ ऐसा सयोंग हो जाए  ना गवाओ मौका जिंदगी के लुफ़्त लेने का  क्या पता कब मौसम बहार हो जाए  भर दो रंगों को इस कदर जिंदगी में  जिंदगी का हर पल गुलाल हो जाए  महका दो दामन खुशियों से सभी का  क्या पता जीवन अपना भी गुलफ़ाम हो जाए **************************************** https://youtu.be/LNzlVmjfFrI  इस कविता को मेरी आवाज में सुनने के लिए आप इस लिंक में जाएं क्योंकि कविता को सुनने का एक अलग ही आनंद होता है

होता है बहुत कुछ इन आँखों तले.......

************************************ मैंने देखा है बहुत कुछ इन आँखों  तले                      हां ये भी प्यार है साहब....  पिंजरे से पक्षी रुखसत करने पे मकान के इर्द-गिर्द घूमते देखा  है मालिक के जनाजे के बाद जानवर को खाने से मुंह घुमाते देखा है                                                           हां ये भी प्यार है साहब... प्यार में भटके इंसान को 'ये बस मेरी माँ कर सकती है' कहते देखा है गरीब की पत्नी को 'चिंता मत करो कुछ गहने है अभी' कहते देखा है                                                                                                              हां ये भी प्यार है साहब... मैंने परदेश  में इंसान को अपने गाँव के लिए तड़पते देखा है  हजारों के महफ़िल में एक पुराने दोस्त को याद करते देखा है                                                     हां ये भी प्यार है साहब... एक हिंदू के इंतक़ाल पे मुस्लिम भाई को कंधा देते देखा है  बीमार बच्चे के पिता को मज़ारो  में मन्नते मांगते  देखा है                                    

वक़्त की अहमियत.........

Lockdown जज़्बात

जिंदगी के फ़साने

गरिमामयी बी. बी. डी.🙏🏻

******************************************** बी. बी. डी. के मंच पर  प्रतिभाओ की कमी नहीं हौसला ए जुनून जो हम में है वो शायद कहीं नहीं जुनून कुछ पाने का इस कदर डोलता है बच्चे बच्चे में यहाँ के एक हुनर बोलता है शिक्षा ही नहीं केवल, हम खेल में भी अभिरुचि रखते है ललित कलाओ का सागर अपनी मुट्ठी में लिए फिरते है शिक्षा का वर्चस्व इस कदर यहाँ लहराया है दूर दराज देश से बच्चा यहाँ पढने आया है देश में शिक्षा के शिखर पर हमारी एक मिसाल कायम है बात होनहार बनने की हो, बी. बी. डी. का नाम हाजिर है विगत वर्षो में हमने कामयाबी के हर मुकाम को छुआ है सिर्फ अपने प्रांगण में नहीं हर कोने में हमारा नाम हुआ है आने वाले समाज का प्रस्तुतीकरण है हम प्रेम और सौहार्द का उज्जवल दीपक है हम हम हमारी उपलब्धियों को कभी भी भूल नहीं पायेंगे बात जब मुकाम की होगी बी. बी. डी.  का नाम बतायेंगे *********************************************

फिर गया दिसम्बर...... जनवरी है आई

 **************************************** दिसम्बर का महिना देखो जाने को है या यूँ कहे यारो, जनवरी आने को है ऐ दिसम्बर मुझे तेरे जाने का गम नहीं है मेरी उम्मीदों को जनवरी ने थाम  रक्खा है वो चाय की चुसकियां, वो कुछ मीठे मीठे से पल उन अपनो की यारियो ने मुझे सम्भाल रक्खा है इस अन्त से ही तो नयी शुरुआत होती है जैसे हर रात के बाद सुबह साथ होती है क्यों रोए हम इस दिसम्बर, उन पुरानी यादों में चलो करते हैं स्वागत जनवरी का, नये वादो से सिर्फ़ यादों की झडियाँ नहीं कितने तजुर्बे साथ हैं शायद तभी जनवरी के महिने में एक नयी आस हैं ये फलसफा यूँ ही चलता रहेगा जैसे पल पल वक्त गुजरता रहेगा फिर दिसम्बर आयेगा एक नयी जनवरी लायेगा ***************************************

चुपचाप सब हो जाता है.........