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अनमोल हैं ये रिश्ता भाई बहन का......


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हाँ आज भी वो सब कुछ याद हैं मुझे , हाँ आज भी
बस वक्त बीता हैं, जैसे कुछ आँखो तले बीता  ही नहीं

भाई की डाट और मेरा लड़ जाना
बात कुछ भी हो पर मेरा जीत जाना

वो शरारतें और वो शैतानियां
वो मेरी जिद और तेरी नादानियां

वक्त शायद तब भी कम पड़ता था
पर बातों की शायद कमी नहीं थी

भाई बहन थे या दोस्त थे हम, समझ ही नहीं आया
एक दूजे की बात बिन कहे समझना, बस यही थे हम

दिन में एक बार तो खैर जम कर बात होनी थी
और ना  हुई तो इस बात पर ही लडा़ई होनी थी

ना मोबाईल पास थे ना म्यूजिक सिस्टम साथ थे
काम खत्म क्या हुआ और बस हम फिर साथ थे

तेरी समझदारी और दुनिया को मैने समझना नहीं चाहा
भाई,  दिन हो या रात  हर मोड़ पर बस मैने तुझे पाया

तेरी हर बात पर मुझे भरोसा था
तेरे ज़रिये मैने दुनिया को जीता था

उम्र का एक पड़ाव मेरा तेरे संग बीता हैं
जिदंगी जीनी कैसे हैं, मैने तुझसे सीखा हैं

माना कि मुलाक़ाते आज-कल कभी कभी होती हैं
पर जब भी मिलते हैं एक अजीब सी खुशी होती हैं

तू फिकरमंद था कल मेरा और निहायत आज भी हैं
इस बात पे गुमान मुझे कल भी था और आज भी हैं

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Comments

  1. Wonderful poem Dr Anshubhi Bahadur

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  2. beautiful....heart touching poetry

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  3. Aaj kal ke logon ko ye sukh kam hi milta h

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  4. Ek bahen ke upr bhi likhiye madam😊😊

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  5. Mind blowing mam, aap ne to kavita ke madyam se mujhe flash back me pahuchaye diya. Thank, s mam.

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  6. सिर्फ ये पढ़ कर अपनी बहन ही याद आजाती है

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  7. Bhai Bahen ka ati sundar vardan

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