Skip to main content

बेहिसाब हसरतों का समंदर हैं जिंदगी.............



***************************************

बेहिसाब हसरतों का समंदर हैं जिंदगी
हर मोड़ पर यहाँ संभलना खुद को ही हैं

चाहो तो बहते रहो,  नदियों में पानी की धार सा
एक वक्त पे आकर समंदर सा ठहरना खुद को ही हैं

फिर क्यों करते हो इंतजार , जश्न ए बरबादी का यहाँ
वक्त से पहले वक्त की नज़ाकत समझना खुद को ही हैं

कितनी हसरतों को अंजाम दोगे यहाँ, मन तो उड़ता पक्षी हैं
इस बेहिसाब आसमान में अपने पंखों को समेटना खुद को हैं

कौन आयेगा तुम्हे संभालने यहाँ, ये घरौदां हैं मन का
चाहो तो बिखर जाओ, यहाँ गिरकर उठना खुद को ही हैं

माना कि भाई, सोच के दायरे आसमान छूते हैं
पर सही गलत का फर्क समझना खुद को ही हैं

ढह जाती हैं हर ईमारत यहाँ पर ,वक्त बे वक्त साहब
थमती सांसों से पहले अपने वजूद को पाना खुद को ही हैं

 ज़नाब यहाँ इज्जत बेआबरू होने में देर नहीं लगती
एहतियातन जिदंगी को शिद्दत से निभाना खुद को ही हैं

****************************************

Comments

  1. Very nice mam. .. Keep writing. ..

    ReplyDelete
  2. Wah zindgi ki sacchi ko kitne gahriyo se samgh kar alfazo ke roop me kavita ke madyam se likhna koi aap se sekhe. Mind blowing. aap ne to sedhe dil ko Choi liya.

    ReplyDelete
  3. beautiful.....heart touching poetry

    ReplyDelete
  4. Yahi Zindagi ka sacch hai.....

    Heart touched- beautiful!;

    ReplyDelete
  5. दिल को छु गई ये poem

    ReplyDelete
  6. चाहो तो बहते रहो, नदियों में पानी की धार सा
    एक वक्त पे आकर समंदर सा ठहरना खुद को ही हैं

    so nice lines

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

होता है बहुत कुछ इन आँखों तले.......

************************************ मैंने देखा है बहुत कुछ इन आँखों  तले                      हां ये भी प्यार है साहब....  पिंजरे से पक्षी रुखसत करने पे मकान के इर्द-गिर्द घूमते देखा  है मालिक के जनाजे के बाद जानवर को खाने से मुंह घुमाते देखा है                                                           हां ये भी प्यार है साहब... प्यार में भटके इंसान को 'ये बस मेरी माँ कर सकती है' कहते देखा है गरीब की पत्नी को 'चिंता मत करो कुछ गहने है अभी' कहते देखा है                                                                                                              हां ये भी प्यार है साहब... मैंने परदेश  में इंसान को अपने गाँव के लिए तड़पते देखा है  हजारों के महफ़िल में एक पुराने दोस्त को याद करते देखा है                                                     हां ये भी प्यार है साहब... एक हिंदू के इंतक़ाल पे मुस्लिम भाई को कंधा देते देखा है  बीमार बच्चे के पिता को मज़ारो  में मन्नते मांगते  देखा है                                    

मुकाम बड़ा हो तो हौसलों में बुलंदी रखना, hosla status

****************************************** मेरा मुकाम बड़ा है फिर तो मेरी मुश्किलें भी बड़ी होंगी पर क्यों हारू हिम्मत, एक दिन मेरी हस्ती की बड़ी होंगी  वक्त से पहले हार जाऊंगा तो लोग नाकाम समझेंगे  ख़ामख़ा मेरी कोशिशें मुझसे ही नाराज हो जाएंगी  कितना वक्त दिया है अपनी हिम्मत को बुलंद करने में  एक पल में जाया हो, इतनी छोटी हसरत मैं नहीं रखता  मुझे मंजिल तक पहुंचना है फिर रास्तों की फिकर कैसी  अक्सर तूफान के बाद ही आसमान साफ होता है  मझधार तक आया हूं रास्तों से दिल नहीं बहलाना  अब तो यह कदम मंजिल पर ही ठहरेंगे   अब आराम भी वही होगा जहां ठिकाने होंगे  बीच समंदर में गोते लगाने का क्या फायदा  जब पंख फैला ही लिए हैं तो उड़ना भी जरूरी है  अब आसमान की ऊंचाई नापने का क्या फायदा *********************************************

वक़्त की अहमियत.........