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किरदार जिदंगी के ..........



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किरदार ए जिदंगी
      मजबूरियाँ बेहिसाब
जुनून ए बयां
      कितना हैं मुश्किल


खुली थी किताब
         नज़ारे बेहिसाब
पन्ने जो बन्द हुए
         भीड़ लाजबाब

यात्राये इतनी
        मसरूफ़ हैं दुनिया
जीवन के असफार का
         तो यहां पता ही नहीं

ये सजना ये सँवरना
       यूँ बन ढन निकलना
ज़मीर ए फितरत
        को जैसे धुला ही नहीं

परदा ए खामोशी
        मुस्कुराहट गालो तक
पर उस खुदा से
        जैसे कुछ छुपा ही नहीं

समेटा सबकुछ
       बिखरे हम खुद
सॉसे  थी अन्तिम
       पर जैसे कुछ मिला ही नहीं

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Comments

  1. bahut bhadiya.......
    परदा ए खामोशी
    मुस्कुराहट गालो तक
    पर उस खुदा से
    जैसे कुछ छुपा ही नहीं

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  2. Nice explanation...bahut khoob

    ReplyDelete
  3. Ajkl Log aise hi hote h..... Nice lines

    ReplyDelete
  4. Ajkl Log aise hi hote h..... Nice lines

    ReplyDelete
  5. tukbandi bahut achi hai iskavita me apki

    ReplyDelete

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